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एमआरपी से अधिक दामों में बिक रही शराब, क्यूआर कोड का नहीं हो रहा पालन

कुंभकर्णी नींद में सोए आबकारी अधिकारी, आमजन लुटने को मजबूर

छिंदवाड़ा (लगी क्या)। जिले में शराब दुकानों की मनमानी चरम पर है। अधिकांश शराब दुकानों में एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) से कहीं अधिक दामों में शराब बेची जा रही है। वहीं, सरकार द्वारा अनिवार्य किया गया क्यूआर कोड स्कैनिंग सिस्टम केवल कागज़ों में ही सीमित रह गया है। ज़मीनी हकीकत यह है कि दुकानदार न तो क्यूआर कोड स्कैन उपलब्ध कर रहे हैं, और न ही उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी दी जा रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शराब की एक बोतल पर छपी एमआरपी से 20 रु से 100 रु तक अधिक वसूला जा रहा है। शिकायत करने पर ग्राहक को धमकाने ओर उनके साथ मारपीट की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इससे साफ़ है कि जिले में शराब सिंडिकेट और आबकारी विभाग की मिलीभगत से खुलेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।

आबकारी विभाग बना मूकदर्शक
शराब दुकानों की इस अवैध वसूली पर निगरानी रखने वाले आबकारी अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। महीनों से इस समस्या की शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन न कोई औचक निरीक्षण हो रहा है, न ही किसी के खिलाफ कार्रवाई।

एक स्थानीय युवा नेता ने आरोप लगाया, “सरकार को करोड़ों का नुकसान हो रहा है, और जनता खुलेआम लूटी जा रही है। आबकारी अधिकारी या तो मिले हुए हैं या गहरी नींद में हैं। जल्द ही आंदोलन कर उन्हें जगाया जाएगा।

क्यूआर कोड व्यवस्था का उद्देश्य ही हो रहा विफल-
सरकार ने शराब के अवैध व्यापार और ओवरचार्जिंग पर अंकुश लगाने के लिए हर बोतल पर क्यूआर कोड अनिवार्य किया था, जिससे उपभोक्ता स्कैन कर मूल कीमत व अन्य जानकारी जान सके। लेकिन अधिकतर दुकानों पर या तो क्यूआर कोड छुपा दिया जाता है या ग्राहक को स्कैन ही नहीं करने दिया जाता।

प्रशासन क्या करेगा कार्रवाई ?
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और आबकारी विभाग इस भ्रष्टाचार और लूट के खिलाफ कब और क्या कदम उठाते हैं। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।

जरा हट के…

प्रवीण काटकर

9424300567