जिले के अधिकांश छात्रावासों में अधीक्षक नहीं रहते रात्रि निवास पर, ग्रामीणों ने खोली पोल
छिंदवाड़ा (लगी क्या) । जिले में जनजाति कार्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दो दिन पहले कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई विभागीय बैठक में सहायक आयुक्त ने दावा किया था कि सभी अधीक्षक छात्रावासों और आश्रमों में रात्रि निवास कर रहे हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, जिले के अधिकांश छात्रावासों और आश्रमों में शाम ढलते ही अधीक्षक अपने घरों को लौट जाते हैं। कई स्थानों पर तो बच्चों को बिना निगरानी के ही रात भगवान भरोसे गुजारनी पड़ती है। इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि शासन द्वारा जारी नियमों की भी खुलेआम अनदेखी हो रही है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में वास्तविकता की जांच कर सच सामने लाता है या फिर एक बार फिर यह मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
ये हाल है जिले के छात्रावासों के –
बिछुआ के सबसे चर्चित अधीक्षक अनुराग शर्मा, श्री पराड़कर, अंबाडा के राकेश रोतीया सहित परतापुर, बांडाबोह, सोनपुर (अमरवाड़ा), लहड़डुआ,लछुआ, पिंडरई, चांद , खमारपानी, खमरा,भंडारकुंड, धनेगाव, भीमालगोंदी मोहखेड़ एससी छात्रावास, लावाघोघरी, न्यूटन, कन्हरगांव,जमनिया जेठू, एवं जिले भर के अधिकांश छात्रावास और आश्रम में यही स्थिति है। जहां शाम होते ही अधीक्षक अपने -अपने घर आ जाते हैं।
जरा हट के…
प्रवीण काटकर
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