अप डाउन करने के लिए स्पष्ट मना करने के बावजूद भी,
रोज छिंदवाड़ा से कर रही अप-डाउन, कन्हरगांव छात्रावास में खतरे में छात्राओं की सुरक्षा,
छिंदवाड़ा (लगी क्या)। जनजातीय कार्य विभाग के अधीन संचालित कन्या छात्रावास, कन्हरगांव में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। यहां पदस्थ अधीक्षिका को छात्रावास मुख्यालय में रहना रास नहीं आ रहा। वह हर शाम अपने घर छिंदवाड़ा लौट जाती हैं और सुबह होते ही फिर छात्रावास पहुंच जाती हैं — ताकि दिखावे में यह प्रतीत हो कि वे वहीं निवासरत हैं।
छात्रावास में 50 छात्राएं निवासरत हैं, जिनकी देखरेख और सुरक्षा का जिम्मा अधीक्षिका के कंधों पर है। नियमों के अनुसार अधीक्षिका का मुख्यालय में निवास करना अनिवार्य है, लेकिन इसकी खुलेआम अनदेखी हो रही है। अधीक्षिका के नियमित गैरहाजिर रहने से आपात स्थिति में कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौके पर नहीं होता, जिससे छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा भगवान भरोसे चल रही है।
जानकारों का कहना है कि यह स्थिति विभागीय लापरवाही का परिणाम है, जहां न तो नियमित निरीक्षण हो रहा है और न ही अधीक्षिका के व्यवहार पर कोई नियंत्रण।
अब सवाल यह उठता है कि क्या विभाग इस लापरवाही पर संज्ञान लेगा, या फिर छात्रावासों की जिम्मेदारी इसी तरह अधूरे भरोसे पर टिकी रहेगी?
छात्रावास की संख्या में भी गोलमाल की बू –
जानकारों की माने तो कन्हरगांव के सीनियर छात्रावास हमेशा चर्चाओं ने बना रहता है, ऐसे ही एक मामले ने छात्रावास की छात्राओ की संख्या को लेकर चर्चा है। जहां सूत्र कहते है कि कम संख्या ओर रिकॉर्ड में अधिक छात्राएं दर्शाया जा रहा है। ये एक बड़ा खेल अधीक्षिका ओर स्टाफ द्वारा खेला जा रहा है, इस खेल के पीछे वजह क्या है ये तो एक बड़ा सवाल है।
इनका कहना है
मेरा क्वार्टर है, में उसी क्वार्टर में रहती हु, में छिंदवाड़ा से आना जाना नहीं करती हू, ये गलत आरोप है।
वीनस दुबे , अधीक्षिका, कन्हरगांव
जरा हट के…
प्रवीण काटकर
9424300567



