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आजादी के 75 साल बाद भी पातालकोट का घूरनी गांव अंधेरे में — न बिजली, न केरोसिन

योजना के नाम पर भारिया जनजाति से धोखा

छिंदवाड़ा (लगी क्या) । आजादी को 75 से भी अधिक वर्ष हो चुके हैं, लेकिन छिंदवाड़ा जिले के पातालकोट क्षेत्र के घूरनी, डोमनी और आसपास के आदिवासी गांव आज भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। इन गांवों के बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक ने अब तक अपने घर में बिजली का बल्ब तक नहीं देखा।

मंगलवार को इन गांवों के ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और जनसुनवाई में अपनी व्यथा सुनाई। ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से उनके घरों में चिमनी और केरोसिन के सहारे रोशनी की जाती थी, लेकिन अब सरकार ने केरोसिन तेल की आपूर्ति भी बंद कर दी है। ऐसे में पूरा गांव रात होते ही अंधेरे में डूब जाता है।

ग्रामीण कमल सिंह भारिया, मन्नालाल भारिया का आरोप है कि कई बार उन्होंने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और बिजली विभाग से गुहार लगाई, लेकिन उनकी समस्याओं को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया।

सरकारी योजनाएं सवालों के घेरे में –
आदिवासी कल्याण और ग्रामीण विकास और भारिया जनजाति के नाम पर चलाई जा रही सरकारी योजनाएं ऐसे गांवों के हालात देखकर खोखली लगती हैं। प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना जैसी योजनाओं के बावजूद यदि गांव आज भी अंधेरे में हैं, तो यह सीधा-सीधा प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है।

ग्रामीणों की मांग –
ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द उनके गांवों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, या फिर वैकल्पिक रूप से सोलर लाइट या केरोसिन तेल की व्यवस्था की जाए, ताकि वे कम से कम रात के अंधेरे में जीने को मजबूर न हों।

जरा हट के…

प्रवीण काटकर

9424300567