छिंदवाड़ा (लगी क्या)|। खनिज विभाग की नींद आखिर कब खुलेगी? बुधवार देर रात गुरेया से छापर गांव की ओर जा रहे रास्ते पर ग्रामीणों ने अवैध मुरम परिवहन कर रहे 5 डंपरों को पकड़ा। घटना रात 12 बजे की है, जब तेज आवाज में गुजरते भारी वाहनों ने ग्रामीणों को चौकन्ना कर दिया।
ग्रामीणों ने डंपरों को रोककर जब पूछताछ की तो मामला गरम हो गया। ग्रामीणों और चालकों के बीच कहासुनी और हंगामा होने लगा। हालात बिगड़ते देख कुछ जागरूक युवकों ने खनिज निरीक्षक को फोन कर मौके पर बुलाने की कोशिश की, लेकिन जवाब मिला – “रात 12 बज गए हैं, मैं नहीं आ सकती।”
जब खनिज विभाग ने आंखें मूंद लीं, तब देहात पुलिस मौके पर पहुंची और हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। लेकिन सवाल यह है कि जब एक जिम्मेदार विभाग अपनी ड्यूटी से भागेगा, तो आम जनता को कानून हाथ में लेने पर कौन रोकेगा ?
किसके संरक्षण में फल-फूल रहे ‘दीपक और पाल’ –
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर रात गोरिया से छापर के बीच दर्जनों डंपर निकलते हैं, जिनमें अवैध मुरम का परिवहन होता है। भारी ट्रैफिक से गांव की सड़कें बर्बाद हो रही हैं और रात में होने वाली आवाजाही से ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि खनिज विभाग की निरीक्षक का ‘आशीर्वाद’ दीपक और पाल नामक अवैध खननकर्ताओं पर बना हुआ है। यही वजह है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो कोई कार्रवाई होती है, और न ही अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं। यह लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक गठजोड़ का सीधा संकेत है।
खनिज विभाग को कटघरे में किया खड़ा :
- निरीक्षक ने मौके पर जाने से इनकार क्यों किया?
- रात में हो रहे भारी परिवहन पर विभाग की निगरानी क्यों नहीं?
-‘दीपक और पाल’ को किसका संरक्षण प्राप्त है?
जरा हट के…
प्रवीण काटकर
9424300567





