डीएफओ की रही मेहरबानी, भोपाल टीम की कार्रवाई ने खोला बड़ा राज
छिंदवाड़ा (लगी क्या)। पश्चिमी वन मंडल में करोड़ों के घोटाले का मामला भले ही अब सामने आया हो, लेकिन इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड ‘नटवरलाल’ लगभग 3 साल पहले ही अपनी करतूतों के चलते पकड़ा गया था। उस समय विभाग के भीतर उसकी गड़बड़ियों के पुख्ता सबूत मिले थे, लेकिन तत्कालीन डीएफओ ईश्वर जरांडे ने उसके खिलाफ सिर्फ औपचारिक कार्रवाई करते हुए उसे कार्य से अलग कर दिया था।
अब जब एक बार फिर नटवरलाल का नाम बड़े घोटाले में सामने आया है, तो विभाग के अंदर और बाहर दोनों जगह यह सवाल उठ रहा है कि आखिर तत्कालीन डीएफओ ने उस समय कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या विभागीय “मेहरबानी” ने ही उसे दोबारा गड़बड़ी करने का मौका दे दिया?
विभागीय सूत्रों के अनुसार, नटवरलाल से जुड़े पुराने रिकॉर्ड में अनियमितताओं की शिकायतें पहले भी दर्ज की गई थीं, जिन्हें जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
अब जबकि जांच फिर से तेज़ हुई है, जिलेभर में यह चर्चा है कि अगर दो साल पहले सख्त कार्रवाई होती, तो आज पश्चिमी वन मंडल की साख पर सवाल नहीं उठते।
भोपाल की कोष टीम नहीं पकड़ती तो डकार जाता लाखों! –
लोगों और विभागीय कर्मचारियों के बीच अब चर्चा है कि अगर भोपाल की कोषालय टीम इस मामले को न पकड़ती, तो नटवरलाल सैकड़ों जरूरतमंदों की रकम हड़प कर जाता। अपनी सख्त छवि के लिए मशहूर तत्कालीन डीएफओ ने भी नटवरलाल के खिलाफ निर्णायक कदम नहीं उठाया , जिससे अब यह सवाल और गहराता जा रहा है कि आखिर मामला केवल लापरवाही का था या इसके पीछे कोई और कहानी छिपी थी?
जरा हट के…
प्रवीण काटकर
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