Home FOREST प्रभारी DFO की नज़र हटते ही दफ्तर बेकाबू, कर्मचारियो के लिए ‘रामराज’!

प्रभारी DFO की नज़र हटते ही दफ्तर बेकाबू, कर्मचारियो के लिए ‘रामराज’!

कर्मचारी मनमर्जी से आते–जाते, जनता की शिकायतों का कोई लेने वाला नही

छिंदवाड़ा (लगी क्या)।  छिंदवाड़ा वन वृत्त के दोनों वन मंडल पूर्व और उत्पादन वन मंडल कार्यालय इन दिनों सुर्खियों के केंद्र बने हुए हैं। कारण एक ही है—यहां प्रभारी DFO की मौजूदगी ने कार्यालय में ऐसा “रामराज” स्थापित कर दिया है कि अधिकारी और कर्मचारी मनमर्जी से न सिर्फ आते हैं बल्कि समय से पहले लौट भी जाते हैं।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, प्रभारी DFO स्वयं कार्यालय में मेहमानों की तरह उपस्थित रहते हैं। जब शीर्ष अधिकारी ही नियमित नहीं है, तो अधीनस्थ कर्मचारी भी खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर सरकारी नौकरी को घर की तरह चला रहे हैं।

कार्यालय का हाल यह है कि किसी अधिकारी के आने का कोई तय समय नहीं, फील्ड स्टाफ सुबह दिखता है, दोपहर होते-होते हवा, आवेदक घंटों खड़े रहकर लौट जाते हैं और दफ्तर में चल रहा है “जो मन में आए वही करो” वाला शासन इस मामले में लोगों का आरोप है कि कर्मचारियों को न तो समय का भय है, न नियमों का, और न ही जनता की व्यथा से कोई मतलब। कई शिकायतकर्ता बताते हैं कि पूरे विभाग में अनुशासन नाम की चीज़ खत्म हो चुकी है, और वन मंडल कार्यालय आजकल फाइलें आगे बढ़ाने की बजाय गेट बंद करने चाय की दुकानों में चुस्की लगाने के लिए ज्यादा मशहूर है।

जनता का कहना है –
“जब DFO खुद दफ्तर को समय नहीं देते, तो अधीनस्थों को कौन रोकेगा?”
कार्यालय की इस बदहाली ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग अब मांग कर रहे हैं कि पूरे कार्यालय में समय पालन की सख्त व्यवस्था, प्रभारी DFO के व्यवहार की जांच, और फील्ड व कार्यालय स्टाफ की उपस्थिति का पारदर्शी सिस्टम लागू किया जाए। जनता की साफ नाराज़गी है कि अगर वन विभाग ऐसे ही चलता रहा, तो जंगलों की सुरक्षा और जनता की समस्याओं का समाधान,दोनों हवा हो जाएंगे।

कुर्सियां खाली, नहीं उठते डीएफओ के फोन –
पांढुरना वन मंडल के डीएफओ को उत्पादन वन मंडल के प्रभारी डीएफओ के नाते जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन यह साहब कब कार्यालय आते हैं और चले जाते हैं इस बात की जानकारी किसी भी कर्मचारीयों के पास नहीं होती। इतना ही नहीं जब डी एफ ओ से संपर्क करने का प्रयास किया जाता है, तो यह अपना सरकारी नंबर भी उठाने से परहेज करते हैं। इन साहब से अगर किसी कर्मचारी को संपर्क करना होता है साहब के कुछ चहेते कर्मचारियों को ही बोलना पड़ता है ताकि प्राइवेट नंबर के माध्यम से साहब से बात हो जाए ।

जरा हट के…

प्रवीण काटकर

9424300567