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वन विभाग में ‘सिस्टमेटिक डकैती’ अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा खुला खेल

मजदूरों की मजदूरी लूटकर रिश्तेदारों को बनाया लखपति !

छिंदवाड़ा (लगी क्या)। वन विभाग में भ्रष्टाचार अब चोरी नहीं, “सिस्टमेटिक डकैती” बन चुका है। देलाखारी में पदस्थ एक वनरक्षक ने मजदूरों की खून-पसीने की कमाई पर बेरहमी से हाथ साफ करते हुए लाखों रुपये अपने ही सगे रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। मजदूरों को एक रुपये का भुगतान नहीं, लेकिन वनरक्षक के रिश्तेदार देखते-देखते लखपति बन गए, वह भी मजदूरी घोटाले के पैसों से !

इस पूरे खेल का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि वनरक्षक अकेला नहीं था। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि यह पूरा घोटाला ऊपर तक सेट था।
जिसमें रेंजर की सहमति, एसडीओ की चुप्पी, और डीएफओ की अनदेखी, इन्हीं तीनों ने मिलकर भ्रष्टाचार को इतना मजबूत बनाया कि मजदूरों की कमाई सीधे उन लोगों की जेब में चली गई जिनका जंगल से कोई लेना-देना ही नहीं।

ग्रामीणों और मजदूरों का गुस्सा अब फूट चुका है। उनका कहना है कि “मजदूर पसीना बहाते रहे, और विभाग के लोग रिश्तेदारों को लखपति बनाते रहे, क्या यही वन संरक्षण है?”

मामले की गंभीरता इस बात से और बढ़ गई है कि विभाग के कई अधिकारी इस घोटाले की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई करने की जगह इसे दबाने में जुटे है । आरोप यह भी है कि विभागीय रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर भुगतान को वैध दिखाने की कोशिश की जा रही है, ताकि ऊपर तक बैठे लोग सुरक्षित रहें।

क्षेत्र में चर्चा है कि यह केवल एक मामला नहीं, बल्कि वन विभाग के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार के संगठित नेटवर्क का हिस्सा है। मजदूरों की कमाई पर किए गए इस डकैती जैसे खेल ने यह साफ कर दिया है कि विभाग की विश्वसनीयता अब बुरी तरह गिर चुकी है।

लोगों का कहना है—
“अगर ऐसे अधिकारी बचते रहे, तो वन विभाग का नाम बदलकर ‘भ्रष्टाचार विभाग’ कर देना चाहिए।”

जरा हट के…

प्रवीण काटकर

9424300567