मटेरियल सप्लायरों को बचाने में लगी खाकी, हर सूचना की कीमत 3 हजार रुपये !
छिंदवाड़ा (लगी क्या)। खनिज विभाग में कानून की रखवाली करने वाली खाकी वर्दी अब माफिया की ढाल बनती नजर आ रही है। विभाग से जुड़ा एक कर्मचारी (खाकी वर्दी धारी) इन दिनों चर्चाओं में है, जो मटेरियल सप्लायरों के लिए मुखबिरी का काम कर रहा है। आरोप है कि यह मुखबिरी मुफ्त नहीं, बल्कि मोटी रकम के बदले की जाती है।
अधिकारी के निकलते ही मटेरियल सप्लायरो के पास पहले ही खबर पहुंच जाती है।
सूत्रों के अनुसार जैसे ही किसी खनिज अधिकारी या उड़नदस्ते के सदस्य विभागीय कार्यालय से बाहर निकलते हैं।
रास्ते में चल रहे रेत, गिट्टी और मुरुम से लदे वाहनों के चालकों को तुरंत सूचना दे दी जाती है
“सावधान हो जाओ, साहब सड़क पर हैं !”
इसी एक कॉल या संदेश के बदले सप्लायरों से 2 से 3 हजार रुपए तक की रकम सप्लायरों से ईनाम के रूप में मिल जाती हैं। विभाग का यह कर्मचारी खाकी वर्दी में माफिया का एजेंट बताया जा रहा है। कर्मचारी (खाकी) की यह भूमिका लंबे समय से चल रही है, लेकिन विभागीय संरक्षण और अधिकारी का चहेता होने के चलते अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
नतीजा यह कि अवैध खनिज परिवहन बेखौफ जारी है।
कार्रवाई से पहले ही वाहन रास्ता बदल लेते हैं-
ईमानदार अधिकारियों की छापेमारी हवा में हो जाती है।
विभाग की साख पर बड़ा सवाल यह है कि जिस कर्मचारी पर अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी है, वही अगर खनिज माफिया का ‘सूत्रधार’ बन जाए, तो कार्रवाई कैसे होगी ?
अब भी रहेगा ‘प्रकाश’ पर अंधेरा ? –
खनिज विभाग पहले ही भ्रष्टाचार और अवैध उत्खनन को लेकर बदनाम है। ऐसे में अगर खाकी वर्दीधारी कर्मचारी खुलेआम मुखबिरी करता रहे और विभाग मौन बना रहे, तो यह चुप्पी भी संदेह के घेरे में आएगी।
अब देखना होगा कि विभागीय अफसर इस ‘मुखबिर’ पर कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।
जरा हट के …
प्रवीण काटकर
9424300567





