सचिव-बाबू के बाद अब अफसर भी ‘रवाना’, जनपद बना तीर्थ यात्रा कार्यालय !
छिंदवाड़ा (लगी क्या)। जनपद पंचायत छिंदवाड़ा इन दिनों विकास योजनाओं से ज्यादा तिरुपति यात्रा शेड्यूल को लेकर चर्चाओं में है। पहले सचिव, फिर बाबू और अब अधिकारी भी बारी-बारी से भगवान वेंकटेश के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं। विभाग में अब एक ही सवाल गूंज रहा है। अगला नंबर किसका है ?
कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि जैसे फाइलें क्रमवार चलती हैं, वैसे ही तिरुपति यात्रा भी सूचीबद्ध तरीके से हो रही है। कोई आकस्मिक अवकाश में तो कोई “जरूरी निजी कार्य” के बहाने, पर मंज़िल सबकी एक- तिरुपती बालाजी। हैरानी यह कि इतनी सामूहिक आस्था के बावजूद कार्यालयी कामकाज पर कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा, कम से कम कागजों में।
सूत्रों की मानें तो जनपद में इन दिनों विकास कार्यों से ज्यादा यह चर्चा गर्म है कि आखिर तिरुपति यात्रा का राज़ क्या है, और क्या यह केवल भक्ति है या फिर कोई “विशेष कृपा” पाने की कोशिश ?
अब निगाहें इस पर टिकी हैं और कार्यालयीन कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि सचिव-बाबू-अफसर के बाद अगली बारी किसकी आएगी, और क्या जनपद पंचायत का नाम जल्द ही “तिरुपति टूर पैकेज कार्यालय” रख दिया जाएगा ?
हालांकि, भक्ति निजी विषय है, लेकिन जब पूरी व्यवस्था ही यात्रा मोड में दिखे—तो सवाल उठना लाज़मी है।
जरा हट के…
प्रवीण काटकर
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