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भूत पिसात निकट नहीं आवे…


हनुमान जयंती पर 7 दिन होंगे विशेष आयोजन, शंकराचार्य सहित देश की ख्याति प्राप्त हस्तियां होंगे शामिल

छिंदवाड़ा – (लगी क्या)। छिंदवाड़ा से 70 किलोमीटर दूर जाम सावली स्थित चमत्कारिक हनुमान मंदिर है..

यहां पर हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा स्थापित है…

यहां की खास बात यह है कि यहां पर भूत पिसाच की बधाएं दूर होती है..

हनुमान जयंती के अवसर पर इस वर्ष पूरे 7 दिन का विशेष आयोजन
शंकराचार्य सहित देश के ख्याति प्राप्त भजन गायक और हस्तियां पहुंच रही हैं जाम सांवली

मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से एवं देश विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं…

यहां भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है और जो रोगी होते हैं वह यहां से निरोगी होकर जाते हैं.

जानकारी के अनुसार यहां पर हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा है उनकी नाभि से जल निकलता है जो भी श्रद्धालु जल ग्रहण करता है उसके सारे दुख दर्द दूर हो जाते हैं…

जामसावली स्थित चमत्कारिक हनुमान मंदिर में हर वर्ष जन्म उत्सव पर शोभायात्रा निकाली जाती है बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं श्रद्धालुओं के रुकने के लिए विशेष व्यवस्थाएं प्रशासन द्वारा बनाई जाती है..
जगह-जगह भंडारे का आयोजन किए जाते हैं

इस वर्ष भी यहां पर पूरे एक सप्ताह का विशेष आयोजन किया गया है आसपास के क्षेत्र सहित मंदिर को पूरी भव्यता से सजाया गया है एवं इसमें शंकराचार्य सहित देश के ख्याति प्राप्त भजन गायक एवं अन्य हस्तियां भाग लेने के लिए आ रहे हैं । इस कार्यक्रम की तैयारी बहुत लंबे समय से की जा रही थी ।

आईए जानते हैं जाम सांवली हनुमान मंदिर के बारे में कुछ विशेष तथ्य –

एक ऐसा चमत्कारिक हनुमान मंदिर जहां विराजित प्रतिमा की नाभि से निकलता है जल

कलयुग में जो सबसे ज्यादा पूजा जायेगा वह हैं राम के भक्त हनुमान ये मान्यता हिंदू धर्म के ग्रंथो और पुराणों में है। आज राम भक्त हनुमान के मंदिर और उनको पूजने वाले भक्त विश्व में सर्वाधिक है. हिंदू मान्यता के अनुसार हनुमान कलयुग में जीवित स्वरूप में मौजूद है हम आपको ऐसे चमत्कारिक हनुमान मंदिर के बारे में बताएंगे जहां विराजित बजरंगबली की मूर्ति विश्राम अवस्था में मौजूद है. हम बात कर रहे मध्यप्रदेश में मौजूद छिंदवाड़ा – नागपुर हाइवे के सौसर तहसील के जाम सावली हनुमान मंदिर की जिसकी ख्याति दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रही है.

जामसवाली हनुमान मंदिर में पीपल के वृक्ष के पास विराजित प्रतिमा कहा से आई कैसे आई इसका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं पर किदवंती के अनुसार जब त्रेता युग में भगवान राम के अनुज भ्राता लक्ष्मण को मेघनाद द्वारा शक्ति बाण का प्रयोग करके मूर्छित किया गया तब उनके उपचार के लिए संजीवनी बूटी लेने हनुमान प्रभु निकले तब इसी पीपल के वृक्ष के नीचे उन्होंने विश्राम किया था. वही कुछ लोगों का यह भी कहना है पहले यहां मूर्ति पूर्व दिशा में मुख किए खड़ी अवस्था में थी, कुछ चोरों डाकुओं को पीपल के वृक्ष के नीचे खजाना होने की जानकारी मिली. फिर उन्होंने उस मूर्ति को वह से हटाने का प्रयास किया जैसे ही मूर्ति को हटाने की कोशिश की गई मूर्ति उस जगह में चमत्कारिक रूप से लेट गई तब से वह यहां चमत्कारिक मूर्ति विश्राम अवस्था में लेटे हुए है.
जामसांवली मंदिर में विराजमान हनुमान जी की मूर्ति की नाभि से एक जलधारा निकलती है। पानी कहां से आता है इसके स्त्रोत के बारे में किसी को नहीं पता। ये जलधारा अनवरत बहती रहती है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इस जलधारा को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। लोगों का मानना है कि इस जल को पीने से चर्मरोगों से मुक्ति मिल जाती है। भूत प्रेत बाधा मानसिक विकार जैसी समस्या का अंत भी इस मंदिर के पूजन पश्चात होता है ऐसा लोगों का मानना है.
धार्मिक सांस्कृतिक आस्था के रूप से विश्वप्रसिद्ध हो चुके जामसावली हनुमान मंदिर टूरिस्ट स्पॉट के रूप में भी मध्यप्रदेश में विशेष स्थान रखता है. मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा के पटल पर जामसावली में श्री हनुमान लोक बनाने का संकल्प प्रस्तुत किया है जिसके बाद से आगामी समय में यह आने वाले हनुमान भक्तों को एक अनोखे हनुमान लोक के दर्शन होंगे।

जरा हट के…

प्रवीण काटकर

9424300567