अधिकारियों की मिलीभगत से कर्मचारियों ने किया बड़ा खेल, विभाग में मचा हड़कंप
छिंदवाड़ा (लगी क्या)। पश्चिमी वन मंडल में एक बार फिर लाखों रुपए के घोटाले का मामला उजागर हुआ है। इस बार घोटाले का खुलासा भोपाल से आई जांच टीम ने किया है। सूत्रों के अनुसार, मंडल में ट्रेजरी से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत लंबे समय से दबाई जा रही थी, लेकिन हालिया जांच में 90 लाख रुपए से अधिक की गड़बड़ी सामने आई है। जिसकी जांच रिपोर्ट भोपाल के अधिकारियों ने कलेक्टर के माध्यम से वन मंडल कार्यालय भेजे जाने की बात सामने आई है !
जानकारी के मुताबिक, पश्चिम मंडल में एक वनरक्षक को ट्रेजरी संबंधी कार्य सौंपा गया था। कार्य के दौरान वित्तीय लेनदेन में लापरवाही और रकम के गोलमाल की शिकायत पर तत्कालीन डीएफओ ने उस कर्मचारी को कार्य से हटा दिया था। हालांकि, इसके बाद आंतरिक जांच रोक दी गई और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
अब भोपाल की टीम द्वारा खातों की गहन जांच के बाद करोड़ों रुपए तक की संभावित हेराफेरी का संकेत मिला है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।
पूर्व और दक्षिण वन मंडल में भी सामने आ सकते हैं घोटाले-
यह मामला केवल पश्चिमी मंडल तक सीमित नहीं है। पूर्व और दक्षिण वन मंडल में भी टीए-डीए के नाम पर लाखों रुपए के फर्जी भुगतान का खुलासा हुआ है। इसकी शिकायत वर्ष 2022 में की गई थी, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत के चलते जांच अधूरी छोड़ दी गई।
पूर्व मंडल का एक संबंधित कर्मचारी अब सेवानिवृत्त हो चुका है, जबकि दूसरा वर्तमान में विभाग में टीए और डीए का कार्य संभाल रहा है। जांच के दौरान अधिकारियों द्वारा आरोपियों को बचाने के स्पष्ट साक्ष्य भी मिले हैं।
पूर्व मंडल में भी हो सकता है बड़ा खुलासा-
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मंडल में दो कर्मचारियों और दक्षिण मंडल के एक कर्मचारी द्वारा टीए-डीए के नाम पर बड़ा खेल खेला गया है। यदि इस मामले की गंभीरता से जांच की गई, तो लाखों रुपए की हेराफेरी सामने आ सकती है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस मामले में पीसीसीएफ, एपीसीसीएफ और लोकायुक्त तक को डीएफओ और जांच अधिकारी द्वारा गुमराह किया गया है।
जरा हट के…
प्रवीण काटकर
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