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आखिर क्या है झंडा की पहाड़ी का राज, दीपक और पाल पर मेहरबानी क्यों ?

कहीं राजनीतिक दबाव में तो नहीं दबी मामले की जांच?

छिंदवाड़ा (लगी क्या)।– झंडा गांव की पहाड़ी इन दिनों मुरम उत्खनन के मामले को लेकर सुर्खियों में है। सवाल यह उठता है कि आखिर इस पहाड़ी का ऐसा क्या राज है, जो लगातार प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण में दफन होता जा रहा है?

बताया जा रहा है कि यहां मुरम उत्खनन के नाम पर लाखों घन मीटर मुरम का अवैध खनन कर लिया गया, जबकि परमिशन मात्र कुछ हजार घन मीटर की थी। इस मामले के उजागर होने के बावजूद, खनिज अधिकारी और खनिज निरीक्षक की मेहरबानी अब तक दीपक और पाल जैसे खननकर्ताओं पर बनी हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब ग्रामीणों ने इस अवैध उत्खनन की शिकायत की, तो कुछ समय के लिए खानापूर्ति हुई, मगर आज तक न तो स्थल का उचित सत्यापन हुआ, न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई। सवाल उठता है कि क्या यह मामला किसी राजनीतिक दबाव में दबाया जा रहा है?

क्या प्रशासन जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है? –
क्या खनिज विभाग और नेताओं के बीच कोई अंदरूनी सांठगांठ है?
क्या सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों को राजनीतिक छत्रछाया प्राप्त है?

इन सवालों के जवाब तलाशना अब जरूरी हो गया है। क्योंकि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आने वाले समय में यह पहाड़ी केवल मुरम के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के प्रतीक के रूप में भी जानी जाएगी।

जरा हट के…

प्रवीण काटकर

9424300567