सावरी और परासिया रेंज के दो कर्मचारी सहित एक दर्जन से अधिक संदेह के घेरे में
छिंदवाड़ा (लगी क्या)। पश्चिमी वन मंडल में एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। विभाग में पदस्थ कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी राशि अपने ही रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दी। बताया जा रहा है कि यह राशि विभागीय योजनाओं और भुगतान मदों से निकाली गई थी।
भोपाल कोष लेखा विभाग की जांच टीम ने जब दस्तावेजों की गहन पड़ताल की, तो इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। प्रारंभिक जांच में सावरी और परासिया रेंज के दो कर्मचारियों सहित एक दर्जन से अधिक अधिकारी और कर्मचारी संदेह के घेरे में बताए जा रहे हैं।
वन मंडल कार्यालय स्तर पर इस पूरे मामले की गोपनीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच दल संबंधित खातों, बिलों और ट्रांजेक्शन का सत्यापन कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, यदि आरोप सही पाए गए तो बड़ी कार्रवाई की संभावना है।
अधिकारियों की मिलीभगत से पूर्व वनमण्डल में भी हुई हेराफेरी-
विभागीय सूत्रों की मानें तो पूर्व वन मंडल में इससे पहले भी बड़े पैमाने पर हेराफेरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कर्मचारियों द्वारा टीए और डीए (यात्रा व भत्ता) के नाम पर लाखों रुपये का गबन किया गया।
शिकायतें मिलने के बाद तत्कालीन डीएफओ ने जांच अधिकारी को निर्देश दिए, लेकिन बाद में मामले को दबा दिया गया।
आज भी वन मंडल के कुछ कर्मचारी अपने नियमित कार्यों के बदले खुलकर राशि की मांग करते देखे जा रहे हैं। बताया जाता है कि कुछ कर्मचारियों ने कम दूरी की यात्राओं के लिए भी टीए और डीए का बिल निकाल लिया और अपने कुछ चहेते रिश्तेदारों के खाते में ट्रांसफर भी कर दिए। जो विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
जरा हट के…
प्रवीण काटकर
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