Home FOREST मवेशियों का शिकार, वन कर्मचारियों की मौज !

मवेशियों का शिकार, वन कर्मचारियों की मौज !

दफ्तर में मुआवजे की राशि की दलाली !, वन विभाग में ‘रिश्तेदार योजना’ उजागर

छिंदवाड़ा (लगी क्या)। वन्य प्राणियों द्वारा मवेशियों का शिकार होना जहां पशुपालकों के लिए भारी नुकसान है, वहीं यही घटना कुछ वन कर्मचारियों के लिए कमाई का जरिया बन गई है। छिंदवाड़ा में वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों के कारनामे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं।
मामला मुआवजा वितरण से जुड़ा है। नियमों के मुताबिक, मवेशी के शिकार पर पशुपालक को मुआवजा दिया जाता है। इसके लिए पीड़ित से सभी औपचारिकताएं पूरी करवाई जाती हैं।आवेदन, पंचनामा, दस्तावेज़, फोटो और सत्यापन। लेकिन हकीकत में मुआवजे की राशि पीड़ित तक पहुंचने से पहले ही रास्ता बदल लेती है।
आरोप है कि कंप्यूटर ऑपरेटर अपने साथी कर्मचारियों के साथ मिलकर यह राशि पशुपालकों के बजाय अपने रिश्तेदारों के खातों में डलवा देते है। बाद में यदि कोई पशुपालक सवाल उठाता है तो उसे मामूली रकम थमाकर चुप करा दिया जाता है।
सूत्रों के अनुसार, सांवरी रेंज में चार से अधिक कर्मचारी इस खेल में शामिल बताए जा रहे हैं। मामला सामने आने के बाद जांच की बात कही जा रही है और परत-दर-परत राज खुलने लगे हैं।
सवाल यह है कि जिन हाथों में जंगल की सुरक्षा और पीड़ितों को राहत पहुंचाने की जिम्मेदारी है, वही हाथ मुआवजे की रकम पर पंजा मार रहे हैं—तो फिर जंगल में उजड़े पशुपालक न्याय के लिए किस दरवाजे पर दस्तक दें ?

वन विभाग में ‘रिश्तेदार योजना’ उजागर –
वन विभाग के पश्चिमी वन मंडल के कर्मचारी इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। जहां वर्तमान में इन कर्मचारियों ने अधिकारियों के साथ मिलकर ” रिश्तेदार योजना” लॉन्च कर दी है। इस योजना के तहत कर्मचारियों के द्वारा अपने ही रिश्तेदारों के खाते में सरकारी राशि डाली जा रही है। चाहे वह पशु मुआवजे की राशि हो या फिर किसी बिल वाउचर की राशि।

चर्चा में है इनके कारनामे –


विभाग से जुड़े सूत्रों की माने तो चर्चित रेंज के कंप्यूटर ऑपरेटर के कारनामों की परते लगातार खुलती जा रही है। एक अन्य मामले में ग्रजेश ने अपने तीन साथी अतिश, सरविंद और फरस राम के साथ मिलकर दर्जनों पशुपालकों की मुआवजा राशि पर डाका डाला है।

जरा हट के…

प्रवीण काटकर

9424300567