अटैचमेंट के नाम पर जनजाति कार्य विभाग का बड़ा खेल, 10 से अधिक शिक्षक ‘आरामगाह’ में भेजे
चढ़ावे के दम पर बच्चों का भविष्य गिरवी, अधिकारी बने मौन दर्शक
छिंदवाड़ा (लगी क्या)। जनजाति कार्य विभाग में एक बार फिर शिक्षा के साथ खुला खिलवाड़ सामने आया है। परीक्षा जैसे संवेदनशील समय में स्कूलों से 10 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं को अटैच कर देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यह अटैचमेंट एक-दो नहीं बल्कि योजनाबद्ध तरीके से किया गया, जिससे दूरदराज़ के स्कूल शिक्षक विहीन हो गए और बच्चों की पढ़ाई ठप पड़ गई।
सूत्रों की मानें तो यह पूरा खेल ‘चढ़ावे’ के बाद गुपचुप तरीके से अंजाम दिया गया। बीते चार महीनों से कुछ चुनिंदा शिक्षक-शिक्षिकाओं को मुख्यालय की एक संस्था में अटैच कर आराम की सुविधा दी जा रही है, जबकि ग्रामीण अंचलों के बच्चे शिक्षक के इंतज़ार में बैठे हैं।
जनजाति कार्य विभाग के बड़े और छोटे साहब की कार्यप्रणाली पहले भी सवालों के घेरे में रही है, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले किया गया यह फैसला विभागीय मंशा पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
जुन्नारदेव, तामिया, हर्रई सहित अन्य विकासखंडों के स्कूलों से शिक्षकों को हटाकर यह साफ कर दिया गया कि प्राथमिकता बच्चों की शिक्षा नहीं, बल्कि अधिकारियों की सेटिंग है।
अब बड़ा सवाल यह है कि –
क्या इस अटैचमेंट खेल की होगी निष्पक्ष जांच?
या फिर हमेशा की तरह बच्चों का भविष्य यूं ही कुर्बान होता रहेगा ?
ये आराम का मामला है –
इस मामले की जानकारी मिलने पर जब टीम मौके पर पहुंची तो उक्त कमरे में सिर्फ दो शिक्षक ही मौजूद थे। शेष शिक्षकों का उन कर्मचारियों को कुछ पता नहीं था। हा, पड़ताल के दौरान एक शिक्षका कमरे से बाहर बैठकर मोबाइल में भारी व्यस्त दिखाई दी, जो लगातार मोबाइल चलाती नजर आई, करीब पौन घंटे तक टीम की मौजूदगी के दौरान शिक्षिका बेखौफ मोबाइल चलाती रही। इसी तरह से उक्त संस्था इन अटैचमेंट किए गए शिक्षकों के लिए आरामगाह के रूप में काम कर रही है।
अगला अंक – इन शिक्षकों पर खासे मेहरबान हैं साहब !
जरा हट के…
प्रवीण काटकर
9424300567





