गौशाला के पीछे फेंके जा रहे शव, कुत्ते नोच रहे अवशेष, पशु चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
छिंदवाड़ा (लगी क्या)। गौ संरक्षण के बड़े-बड़े दावों के बीच जिले से एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। शहर से सटी मोठार गौशाला में बीमार और मृत गौवंश के शवों का विधिवत अंतिम संस्कार करने के बजाय उन्हें गौशाला के पीछे जंगल में फेंके जाने का आरोप है। हालत यह है कि इन शवों को आवारा कुत्ते नोच रहे हैं और जगह-जगह बिखरे अवशेष पूरे मामले की गंभीरता को बयां कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि गौशालाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी संभालने वाला पशु चिकित्सा विभाग आखिर कर क्या रहा है ? आरोप है कि विभागीय अधिकारी केवल कागजी निरीक्षण और औपचारिकताएं पूरी कर झूठी रिपोर्ट के आधार पर मीडिया में सुर्खियां बटोरते नजर आते हैं, जबकि जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग है। यदि समय पर निगरानी और कार्रवाई होती, तो गौ माता की ऐसी दुर्दशा शायद देखने को नहीं मिलती।
ग्रामीणों का कहना है कि इस गंभीर मामले की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लगभग 7 माह से अनुदान नहीं, उपसंचालक पर लापरवाही के आरोप-
गौशाला से जुड़े लोगों का आरोप है कि पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक की उदासीनता के कारण गौशाला को मिलने वाली सरकारी अनुदान राशि पिछले सात माह से जारी नहीं हुई है। आरोप है कि राशि स्वीकृत कराने के लिए आवश्यक विभागीय प्रयास ही नहीं किए गए, जिसके कारण प्रत्येक गाय के भोजन और देखभाल के लिए मिलने वाली सहायता अटक गई। इससे गौशाला संचालन और गौवंश के पालन-पोषण पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
गौ संरक्षण के नाम पर करोड़ों खर्च –
गौ संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि गौशालाओं में मृत गौवंश का सम्मानजनक अंतिम संस्कार तक नहीं हो पा रहा, तो जिम्मेदार कौन है ? क्या प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा ?
जरा हट के…
प्रवीण काटकर
9424300567





