Home Uncategorized पशु चिकित्सा विभाग में ‘साहब का कानून’!

पशु चिकित्सा विभाग में ‘साहब का कानून’!

सरकारी नियम ताक पर, अनुभवहीन कर्मचारियों को सौंपा लेखा विभाग

लेखापाल को दरकिनार कर दो महिला कर्मचारियों को मिला प्रभार, विभाग में पुराने वित्तीय मामलों को दबाने की चर्चा तेज

छिंदवाड़ा। पशु चिकित्सा विभाग एक बार फिर चर्चाओं में है। आरोप हैं कि विभाग में सरकारी नियमों से अधिक उपसंचालक के बनाए “नियम” लागू हो रहे हैं। कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि विभाग में जिम्मेदारियां नियमों के बजाय अधिकारियों की पसंद के आधार पर सौंपी जा रही हैं।
हाल ही में विभाग में लेखा शाखा से जुड़ा एक मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, लेखा कार्य देख रहे बड़े बाबू के सेवानिवृत्त होने से पहले ही विभाग के उपसंचालक ने लेखा शाखा की जिम्मेदारी दो महिला कर्मचारियों को सौंप दी। कर्मचारियों का कहना है कि इन दोनों को लेखा कार्य का पर्याप्त अनुभव नहीं है, फिर भी उन्हें महत्वपूर्ण वित्तीय जिम्मेदारी दी गई।
विभागीय सूत्रों का दावा है कि कार्यालय में नियमित रूप से पदस्थ लेखापाल होने के बावजूद उसे यह प्रभार नहीं दिया गया। कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी है कि यदि नियमों के अनुसार लेखापाल को जिम्मेदारी सौंपी जाती तो विभाग के पुराने वित्तीय मामलों और फाइलों की गहन जांच की संभावना बढ़ जाती।
सूत्रों के अनुसार, विभाग पहले भी विभिन्न योजनाओं और कार्यों को लेकर सवालों के घेरे में रहा है। इनमें स्मॉल होल्डर पोल्ट्री योजना, पशु स्वास्थ्य केंद्रों में विद्युत फिटिंग सहित अन्य कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की चर्चा होती रही है। ऐसे में लेखा शाखा में अनुभवहीन कर्मचारियों को जिम्मेदारी दिए जाने के निर्णय ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग में नियमित लेखपाल उपलब्ध है, तो उसे दरकिनार कर अनुभवहीन कर्मचारियों को लेखा शाखा का प्रभार किस आधार पर सौंपा गया ? क्या यह फैसला सरकारी नियमों के अनुरूप है या फिर इसके पीछे कोई और वजह है ? इन सवालों के जवाब का इंतजार विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ आम लोगों को भी है।