कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखा रहे निगम के अधिकारी
छिंदवाड़ा – कलेक्ट्रेट और निगम के सभा कक्ष में बैठकर यातायात और पार्किंग की चिंता अधिकारियों के द्वारा जताई जाती है। यह चिंता सिर्फ सभा कक्ष तक सीमित रहती है। ऐसा एक बार नहीं कई बार सामने आ चुका है। अवैध बेसमेंट को लेकर कलेक्टर के आदेश पर निगम के अधिकारियों ने औपचारिकता निभाते हुए कार्रवाई की, लेकिन इसके बाद चुपचाप इस कार्रवाई को रोक दिया गया। जब इस बात की जानकारी कलेक्टर तक पहुंची तो उन्होंने फिर बेसमेंट पर कार्रवाई करने के निर्देश जारी करते हुए टीम बना दी। टीम के द्वारा ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 100 से अधिक बेसमेंट को सील किया गया। लेकिन दिवाली का अवसर होने के कारण राजनीतिक दबाव में इस कार्रवाई को भी रोक दिया गया। जो फिलहाल अब तक रुकी हुई है। न तो निगम के अधिकारियों को पार्किंग और यातायात की चिंता है और न ही कलेक्टर के आदेश को गंभीरता से लेना चाहते हैं। जिससे यह तो साफ है कि निगम के अधिकारी स्वयं ही बेसमेंट संचालकों पर अपनी मेहरबानी बनाए हुए हैं। दिवाली के बाद से एक माह से अधिक का समय बीत जाने पर भी निगम के अधिकारियों ने किसी प्रकार से कोई बेसमेंट पर कार्रवाई करने को लेकर चिंता नहीं जताई। जो कई सवालों को जन्म दे रही है। निगम के जानकारों की माने तो कुछ बेसमेंट संचालकों ने सेटिंग करते हुए अवैध बेसमेंट को वैध करने का प्रयास किया। और वे सफल भी हो गए। इस पूरे खेल में निगम के अधिकारियों की सेवा भी जमकर हो चुकी है। सेवा होने के बाद निगम के अधिकारियों ने इस और ध्यान देना बंद कर दिया। निगम के अधिकारी आए दिन अपनी कार्यप्रणाली को लेकर किसी न किसी मामले पर चर्चा में बने रहते हैं। यह मामला भी निगम के गलियारे में चर्चा का विषय बना हुआ है।
आखिर बेसमेंट संचालकों पर क्यों मेहरबान है निगम के अधिकारी –
निगम के अधिकारी बेसमेंट संचालकों पर क्यों मेहरबान है, यह सवाल शहर के हर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके अलावा यह अभी चर्चा शहर में है कि अतिक्रमण को लेकर भी सिर्फ निगम के द्वारा औपचारिक निभाई जा रही है। जहां एक फोन पर अतिक्रमण तोड़ने की कार्रवाई को रोक दिया जाता है। और फुटपाथ पर गरीबों की छोटी-छोटी दुकानों को तोड़ दिया जाता है। यह कहां तक न्याय उचित है।
नींद से जागो साहब –
निगम के अधिकारी हमेशा ही अपनी कार्यवाही को लेकर गहरी नींद में सोए नजर आते हैं। उन्हें हमेशा ही मीडिया के माध्यम से कार्रवाई को लेकर जगाने का प्रयास किया जाता है। इसके अलावा कलेक्टर के आदेश पर भी निगम के अधिकारी जागकर कार्रवाई में सिर्फ औपचारिकता निभाते दिखाई देते हैं।
जरा हट के …
रिपोर्ट…
प्रवीण काटकर
9424300567





