जांच अधिकारी ने की लीपापोती, दर्जनों खामियां उजागर , स्वास्थ्य विभाग मौन
छिंदवाड़ा। (लगी क्या)। लालबाग क्षेत्र स्थित कृष्णा अस्पताल को लेकर एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, अस्पताल का पंजीयन 31 मार्च को समाप्त हो चुका है, बावजूद इसके अस्पताल का संचालन बदस्तूर जारी है। इससे न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहा है, बल्कि मरीजों की जान भी खतरे में डाली जा रही है।
विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो अस्पताल की जांच के दौरान दर्जनों खामियां सामने आईं, फिर भी जांच अधिकारी द्वारा किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि विभागीय अधिकारी कहीं न कहीं अस्पताल प्रबंधन को ‘संरक्षण’ दे रहे हैं।
अप्रशिक्षित स्टाफ से कराया जा रहा इलाज –
रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में अनधिकृत और अप्रशिक्षित स्टाफ कार्यरत हैं, जो बिना योग्यता के मरीजों का इलाज कर रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन द्वारा रजिस्ट्रेशन करवाने के दौरान नियमों को ताक पर रखते हुए स्टाफ की जानकारी को लेकर धोखाधड़ी भी की गई है।
कार्रवाई के बदले खामोशी–
स्वास्थ्य विभाग के जांच अधिकारी पूर्व में भी अपने निर्णयों को लेकर विवादों में रहे हैं। कृष्णा अस्पताल के मामले में भी लगातार शिकायतों और खामियों के उजागर होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। कई स्रोतों का कहना है कि “तगड़ी सेवा” के चलते कार्रवाई को रोका गया है।
मौन स्वास्थ्य विभाग — बड़ा हादसा इंतजार में?
जब अस्पताल के पंजीयन की अवधि समाप्त हो चुकी है, और अस्पताल संचालन नियम विरुद्ध है, तब विभागीय चुप्पी चिंता का विषय है। क्या स्वास्थ्य विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?
जरा हट के..
प्रवीण काटकर
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