‘दक्षिणा’ ने बंद की आंखें, मौन हुई जुबान! उमरिया इसरा में दिनदहाड़े अवैध खनन, अधिकारी बेखबर!
छिंदवाड़ा – (लगी क्या)। जिले में अवैध खनन का ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ जैसा हाल है! सोनपुर और बड़गोना की पहाड़ियों को छलनी करने के बाद, अब खनन माफियाओं की जेसीबी मशीनें उमरिया इसरा की पहाड़ियों पर गरज रही हैं।
दिनदहाड़े हो रही इस खुली लूट को आम नागरिक तो देख पा रहे हैं, लेकिन लगता है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की आंखें कमजोर हो गई हैं या फिर किसी ‘विशेष चश्मे’ ने उन्हें सब कुछ धुंधला दिखा रहा है! कहीं ऐसा तो नहीं कि ‘दक्षिणा’ की मधुर ध्वनि ने विभाग के कानों के साथ-साथ उनकी अंतरात्मा को भी शांत कर दिया है?
पिछले कुछ समय से बड़गोना डेम और सोनपुर की पहाड़ियों में मुरम की अवैध खुदाई का खेल चल रहा था। अब इस सूची में उमरिया इसरा की पहाड़ी का नाम भी जुड़ गया है। यहां जेसीबी मशीनें और ट्रैक्टर खुलेआम मिट्टी और मुरम को चीरते हुए देखे जा सकते हैं।
हैरानी की बात यह है कि इतने स्पष्ट प्रमाण होने के बावजूद, खनिज विभाग की तरफ से कोई भी ‘उंगली’ तक नहीं उठाई गई है।
सूत्रों की मानें तो इस ‘मिट्टी के कुबेर’ के पीछे अ.वारे की मशीनों का बेड़ा और सो.नारे की सप्लाई का मजबूत नेटवर्क काम कर रहा है। इन दोनों की ‘पवित्र’ जुगलबंदी ने बड़गोना क्षेत्र में अवैध मुरम उत्खनन को एक संगठित उद्योग का रूप दे दिया है।
आलम यह है कि इन माफियाओं ने सड़क पर भी मुरम डालकर अपनी ‘पहचान’ को और भी पुख्ता कर दिया है!
इन सबके बावजूद खनिज विभाग के अधिकारी गहरी नींद में सो रहे हैं। जानकार तो यहां तक कह रहे हैं कि इन ‘मिट्टी पुत्रों’ की विभाग में ‘ऊंची सेटिंग’ है, जिसके चलते उन्हें ‘खुदाई लाइसेंस’ की भी जरूरत महसूस नहीं होती!
अब देखना यह है कि प्रशासन कब इस ‘कुंभकर्णी नींद’ से जागता है। यदि समय रहते इस अवैध कारोबार पर लगाम नहीं कसी गई, तो न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान होगा, बल्कि यह गोरखधंधा पूरे जिले के लिए एक ऐसा ‘काला अध्याय’ बन जाएगा, जो यह सिखाएगा कि नियमों को ताक पर रखकर भी कैसे ‘समृद्धि’ हासिल की जा सकती है!
जरा हट के…
प्रवीण काटकर
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