Home FOREST जंगल के रक्षक बने भक्षक,केबिन में बैठकर हो रही जंगल की मॉनिटरिंग

जंगल के रक्षक बने भक्षक,केबिन में बैठकर हो रही जंगल की मॉनिटरिंग

हरे भरे पेड़ों पर चल रही कुल्हाड़ी, हो रहा अतिक्रमण

छिंदवाड़ा – जंगल और जंगली जानवर की सुरक्षा करने वाले वन अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यों के प्रति कितने सजग है या छिंदवाड़ा जिले के जंगल को देखकर लगाया जा सकता है। जहां वन कर्मचारी इन दिनों रक्षक की भूमिका न निभाते हुए भक्षक बन बैठे हुए हैं। वन अपराधियों से साठ गांठ कर पेड़ काटने की अनुमति दे रहे हैं,वही सामने देखकर जंगल में अतिक्रमण भी करवा रहे हैं। इन सब बातों की जानकारी वन अधिकारियों को होने के बाद भी उनकी चुप्पी साधे रहना कई सवालों को जन्म दे रहा है। ऐसा ही एक मामला दक्षिण वन मंडल के कन्हान रेंज एवं आसपास के जंगलों में हाल ही में सामने आया है।
छिंदवाड़ा वन वृत के तहत आने वाले तीनों वन मंडलों में इन दिनों कर्मचारियों के द्वारा भारी लापरवाही बरती जा रही है। जहां सालों पुराने सागोन के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। तो वहीं अब वन अपराधियों से मिलकर उन्हें वन भूमि में अतिक्रमण के लिए खुली छूट तक वन कर्मचारियों द्वारा दे दी जा रही है। ऐसे ही मामले में कन्हान और बिछुआ रेंज के जंगलों में साफ तौर पर देखने मिल रहा है। जहां वन अपराधियों ने वन कर्मचारी के साथ मिलकर कई एकड़ वन भूमि में अतिक्रमण करते हुए कब्जा जमा लिया है। इन सब बातों की जानकारी कर्मचारियों के साथ-साथ वन अधिकारियों को भी लेकिन किसी भी वन अधिकारी ने इन मामलों को गंभीरता से नहीं लिया और न हीं वन भूमि को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने के लिए कोई जहमत उठाई। वन अधिकारी और कर्मचारियों की यह लापरवाही आने वाले समय में छिंदवाड़ा की पहचान खो देगी।

चुप्पी साधे बैठे है अधिकारी –
बिछुआ रेंज के खमारपानी सर्किल में आने वाली बोरिया बीट से लेकर सहनवाड़ी, कुर्सीपार सहित आसपास के वन क्षेत्र में भारी मात्रा में मैदानी हमले से साठ गांठ करते हुए वन अपराधियों ने अवैध रूप से अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया है। दबी जवान से वन कर्मचारियों ने यह तक कहने में कोई कसर नहीं छोड़ी की, इसकी जानकारी अधिकारियों को भी है। लेकिन उनके द्वारा ही कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसके कारण लगातार वन क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ते जा रहा है।

संदिग्ध है डिप्टी डेंजर की भूमिका –
इस मामले में विभागीय सूत्रों की माने तो इन वन क्षेत्र में अतिक्रमण की छूट देने वाले और अमित कटाई के मामले में स्थान या कर्मचारी की भूमिका हमेशा संदिग्ध बनी रहती है। वर्तमान में भी इस क्षेत्र के एक डिप्टी साहब और कुछ वन कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है। इस मामले में जानकारी चाही गई तो उन्होंने जानकारी देना उचित नहीं समझा और खुद को पाक साफ बताते हुए फोन काट दिया।

जरा हटके…

रिपोर्ट …

प्रवीण काटकर

9424300567