छिंदवाड़ा। (लगी क्या)। “गरीबों पर सितम, अमीरों पर रहम” — यह कहावत इन दिनों छिंदवाड़ा नगर पालिक निगम की कार्यप्रणाली पर सटीक बैठती दिख रही है। नगर निगम का अतिक्रमण विरोधी दस्ता रोज़ाना सड़क किनारे छोटी-छोटी दुकानों को हटाने में तो सक्रिय है, लेकिन शहर के बड़े अतिक्रमणों पर कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहा है।
ताज़ा मामला पंकज टॉकीज क्षेत्र का है, जहां एक गन्ने की दुकान लगाने वाले युवक ने अतिक्रमण दस्ते की कार्रवाई से परेशान होकर खुद पर केरोसिन डाल लिया। यह दिल दहला देने वाला दृश्य देखकर निगम की टीम को मौके से बैरंग लौटना पड़ा।
स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि प्रशासन केवल गरीब और रोज़ कमाने-खाने वालों को निशाना बना रहा है, जबकि गोलगंज और अन्य क्षेत्रों में बड़े-बड़े बेसमेंट और स्थायी अतिक्रमण पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। लोगों का कहना है कि निगम के पास इतना साहस नहीं कि वह प्रभावशाली अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कदम उठा सके। बेसमेंट अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी राजनीतिक दबाव में बंद कर दी गई है।
दुकानदारों की मांग है कि निगम पहले बड़े अतिक्रमण हटाए, फिर उन लोगों को देखे जो अपनी रोजी-रोटी के लिए दिनभर मेहनत कर रहे हैं। यह मामला नगर निगम की निष्पक्षता और संवेदनशीलता दोनों पर सवाल खड़ा करता है।
जरा हट के…
प्रवीण काटकर
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