छिंदवाड़ा (लगी क्या)। जिले में खनिज विभाग के भीतर एक अघोषित ‘राम राज’ का आलम है, जहां नियम-कानून सिर्फ कागजों तक सिमट गए हैं और ज़मीनी हकीकत में अवैध उत्खनन और परिवहन पर आंखें मूंद ली जाती हैं। सूत्रों की मानें तो विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह गोरखधंधा खुलेआम फल-फूल रहा है।
‘ चढ़ौती’ के बाद अधिकारियों को नजर नहीं आता अवैध उत्खनन और परिवहन
जिले के कई ग्रामीण और वन क्षेत्र ऐसे हैं जहां से प्रतिदिन भारी मात्रा में मुरम, रेत और अन्य खनिजों का अवैध उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। लेकिन खनिज विभाग की टीम न तो मौके पर जाती है और न ही कोई ठोस कार्रवाई करती है। कारण साफ है – ‘चढ़ौती’, यानी अवैध कारोबारियों द्वारा विभागीय अफसरों को दी जाने वाली महीना या घूस की रकम।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कोई नागरिक शिकायत करता भी है तो या तो उसे टाल दिया जाता है या फिर नाम पूछकर डराया धमकाया जाता है। जबकि कई बार ग्रामीणों द्वारा सोशल मीडिया और प्रशासनिक पोर्टल पर सबूत सहित शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती।
जानकारों के मुताबिक, जिन क्षेत्रों में अवैध खनन हो रहा है, वहां की मिट्टी और खनिजों की कीमत लाखों में है, और एक मजबूत गठजोड़ की बदौलत इसका फायदा निजी जेबों तक पहुंच रहा है। कुछ स्थानों पर तो इतने बड़े पैमाने पर उत्खनन हो रहा है कि पूरी की पूरी पहाड़ी ही गायब होती जा रही है, लेकिन विभाग को कुछ नजर नहीं आता।
अब सवाल उठता है कि क्या खनिज विभाग की चुप्पी सिर्फ ‘चढ़ौती’ की वजह से है? या फिर प्रशासनिक स्तर पर भी कोई दबाव है जो कार्रवाई से रोके हुए है?
छिंदवाड़ा में खनिज विभाग की निष्क्रियता से प्रशासन की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि क्या जिले के जिम्मेदार अधिकारी इस ‘राम राज’ को खत्म कर कानून का राज स्थापित कर पाते हैं या नहीं।
झंडा की पहाड़ी का सच छिपाने पुरजोर कोशिश –
खनिज विभाग के नए नए लापरवाही के मामले लगातार सामने आ रहे है, लेकिन आला अधिकारियों की मेहरबानी इसके बाद भी बनी हुई है। शहर से लगे हुए झंडा गांव की पहाड़ी को पूरी तरह से खनिज माफियाओं ने अधिकारी की मिलीभगत से छलनी कर दिया। जब यह मामला सुर्खियों में आया तो इस मामले को दबाने के लिए सारे कागजी हथकंडे अपनाना शुरू कर दिए गए ओर कागजों में हेरा फेरी कर अपने मंसूबों पर कामयाब भी हो गए।
प्रमुख सचिव ने कार्रवाई न होने पर जताई नाराजगी –
खनिज विभाग और खनिज माफियाओं की जुगलबंदी के कारण जिले में अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इस बात की पुष्टि तब हुई जब खनिज विभाग के प्रमुख सचिव ने बैठक लेकर संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की जानकारी मांगी लेकिन छिंदवाड़ा के अधिकारी द्वारा पेश की गई जानकारी देखते ही पीएस दंग रह गए। दरअसल खनिज विभाग के द्वारा कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता ही निभाई जा रही है। जिसको लेकर नाराजगी जताते हुए पीएस ने शुक्रवार को बैठक में जमकर फटकार भी लगाई।
इस मामले में खनिज अधिकारी रविन्द्र परमार का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया।
जरा हट के…
प्रवीण काटकर
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