Home CITY NEWS खनिज माफियाओं का पासवर्ड बनी रॉयल्टी !

खनिज माफियाओं का पासवर्ड बनी रॉयल्टी !

दिखाओ रॉयल्टी, लूटो सरकार, छिंदवाड़ा में कानून बेबस

लास गांव में चोरी की रेत भरते पकड़ा गया था मिनी ट्रक, छूटा ‘सेवा’ या ‘आशीर्वाद’ का मिला फल !

छिंदवाड़ा (लगी क्या)। जिले में खनिज चोरी अब चोरी नहीं रही, बल्कि विभागीय संरक्षण में चल रहा संगठित धंधा बन चुकी है। खनिज विभाग के दावों की पोल उस वक्त खुल गई, जब लास गांव में चोरी की रेत भरते मिनी ट्रक को रंगे हाथ पकड़ा गया, लेकिन कानून की किताब बंद कर रॉयल्टी की पर्ची खोल दी गई और कुछ ही देर में मिनी ट्रक रिहा!
सूत्रों के मुताबिक खनिज विभाग का स्टाफ मौके पर उस समय पहुंचा जब मजदूर खुलेआम अवैध रेत भर रहे थे। नियमों के मुताबिक वाहन जब्त होना चाहिए था, और पूरे अवैध भंडारण को सीज किया जाना था। लेकिन हुआ क्या ? वाहन मालिक ने रॉयल्टी दिखाई, टीम ने आंखें मूंद लीं और करीब आधा दर्जन वाहनों से किया गया अवैध रेत भंडारण मानो हवा में घुल गया।

कानून नहीं, सेटिंग चल रही है! –
सबसे गंभीर सवाल यह है कि मौके पर मौजूद अवैध रेत का विशाल भंडारण किसका था ?, कहां से आई रेत ? कितनी मात्रा में उत्खनन हुआ ?
इन सवालों की जांच करना तो दूर, खनिज अधिकारी ने जानबूझकर अनदेखी की, जिससे साफ संकेत मिलता है कि यह लापरवाही नहीं बल्कि खुला संरक्षण है।
सूत्रों का दावा है कि वाहन मालिक द्वारा “अच्छी-खासी सेवा” की गई , इसलिए पूरा मामला मैनेज कर दिया गया। यही वजह है कि खनिज माफिया बेखौफ हैं और सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है।

एक रॉयल्टी—अनगिनत चक्कर! –

खनिज माफियाओं का नया फार्मूला बेहद सरल है, एक बार रॉयल्टी कटवाओ, उसी कागज पर पूरा दिन अवैध परिवहन करो। इस खेल में अधिकारी भी हिस्सेदार हैं, तभी तो रॉयल्टी “दस्तावेज़” नहीं बल्कि ढाल बन चुकी है।

पसंद नहीं आई रेत या सेटिंग –

वाहन मालिक श्री जामकर का कहना है कि रेत पहले डलवाई गई थी, लेकिन ग्राहक को पसंद न आने पर वापस ले जाई जा रही थी। सवाल यह है कि
क्या बिना अनुमति जमा की गई रेत कानूनी हो जाती है?
और क्या “पसंद नहीं आई” कहना कानून से बड़ा बहाना है?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या खनिज विभाग माफियाओं का फ्रंट ऑफिस बन चुका है ? क्या कलेक्टर और शासन इस खुले खेल पर आंख मूंदे बैठे हैं ?
या फिर यह मान लिया जाए कि छिंदवाड़ा में रॉयल्टी ही कानून है, बाकी सब दिखावा !