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बिछुआ और मोया स्कूल के बाबू बने पंगु, शिक्षक बाबूगिरी कर काट रहे चांदी

मुख्यालय में बैठे अधिकारियों के नाम से हो रही वसूली

मेडिकल, अर्जित अवकाश सहित अन्य कार्य की तय है दक्षिणा

छिंदवाड़ा (लगी क्या)। जनजाति कार्य विभाग के अंतर्गत आने वाले शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बिछुआ और मोया स्कूल में इन दिनों अजीब हालात हैं। यहां बाबू तो कार्यालय में आराम फरमा रहे हैं, लेकिन शिक्षक ही बाबूगिरी का काम करते हुए अवैध उगाही का जरिया बना बैठे हैं।

शिक्षकों पर आरोप है कि वे मुख्यालय में बैठे अधिकारियों का नाम लेकर हर काम के एवज में रुपये वसूल रहे हैं। यहां तक कि अलग-अलग कार्यों के लिए उन्होंने “दक्षिणा” के दाम भी तय कर रखे हैं।

शातिर हीरा- धन की जुगलबंदी –

विभागीय सूत्रों के अनुसार, बीते कुछ माह से शिक्षक हीरा और धन की जुगलबंदी लगातार चर्चाओं में है। जिनके द्वारा मेडिकल अवकाश, अर्जित अवकाश, सेवा निवृत्ति व पेंशन, जीपीएफ राशि निकालने सहित अन्य विभागीय कार्यों के लिए खुलेआम पैसों की मांग की जा रही है।

सेटिंग के बिना नहीं होता काम –

शिक्षकों का कहना है कि बिना “सेटिंग” और दक्षिणा दिए कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ रही। मुख्यालय स्तर पर बड़े अधिकारियों का नाम लेकर दबाव बनाया जाता है और शिक्षक मजबूरी में राशि अदा करने को बाध्य होते हैं।

हालिया मामला –

प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों की 3 वर्ष संविदा अवधि पूर्ण होने पर फाइल भेजने के लिए 5 हजार से 10 हजार तक की वसूली तय है। 12 वर्ष पूर्ण होने पर क्रमोन्नति फाइल के लिए 3 हजार से 5 हजार तक की मांग की जा रही है।

जांच की मांग –

स्थानीय स्तर पर यह पूरा मामला शिक्षा व्यवस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला माना जा रहा है। जिले में शिक्षकों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस बाबूगिरी और अवैध वसूली की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

जरा हट के…

प्रवीण काटकर

9424300567