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“पश्चिमी वन मंडल में घोटाले की आग बुझी नहीं, अब दमुआ रेंज में सामने आया नया घोटाला, रिश्तेदारों के खातों में बहा सरकारी पैसा”

“शातिर नाकेदार अनित का कारनामा—फेल पेमेंट दिखाकर उड़ाए लाखों, साथी और प्राइवेट कर्मचारी शामिल

छिंदवाड़ा (लगी क्या)।लूट सको तो लूट लो ” की तर्ज पर इन दिनों वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सरकारी खजाने को लूटने में लगे हुए हैं ! इधर पश्चिमी वन मंडल में हुए बड़े घोटाले की जांच अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि इसी वन मंडल के दमुआ रेंज से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां विभाग के दो नियमित कर्मचारियों ने एक प्राइवेट कर्मचारी की मदद से लाखों रुपये का फर्जी पेमेंट करवा लिया। बड़ा घोटाला सामने आने के बाद भी अधिकारियों की मेहरबानी कई सवालों को जन्म दे रही है।

जानकारी के अनुसार, शातिर कर्मचारियों के द्वारा विभागीय भुगतान प्रक्रिया में जानबूझकर पेमेंट फेल दिखाए गए, और उन्हीं फेल पेमेंट को रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर करवा दिया गया। घोटाले की यह परत खुलने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में शातिर नाकेदार अनित की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। उसने अपने साथी को भी इस खेल में शामिल किया, जबकि तकनीकी प्रक्रिया में मदद के लिए एक प्राइवेट कर्मचारी बोरब की सहायता ली गई। तीनों ने मिलकर विभागीय सिस्टम का दुरुपयोग करते हुए फर्जी भुगतान को सफलतापूर्वक अपने करीबियों के खातों में डलवा दिया।

बताया जा रहा है कि जिन पेमेंट को विभागीय रिकॉर्ड में फेल दिखाया गया, वे वास्तव में निजी खातों में ट्रांसफर होकर लाखों रुपए की सीधी हेराफेरी में तब्दील हो गए।

हालांकि विभाग अभी इस मामले पर आधिकारिक बयान देने से बच रहा है। रेंज के भीतर इस तरह की संगठित हेराफेरी सामने आने पर कर्मचारियों में भी चिंता का माहौल है।

वन विभाग के भीतर लगातार सामने आ रहे वित्तीय गड़बड़ी के मामलों ने प्रशासनिक निगरानी और भुगतान प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जो अधिकारियों की मिली भगत की ओर इशारा कर रहे हैं।

जरा हट के…

प्रवीण काटकर

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